shani bhagwan-शनि भगवान

 shani bhagwan-शनि भगवान

shani bhagwan-शनि भगवान

 shani bhagwan-शनि भगवान पुरानी कथाओं में हिन्दुओं में देवी देवताओं की कथाओं का उल्लेख क्या है भगवान शनि देव की कहानी बड़ो को और बच्चो को मन की भाती है  चारो लोगो में भगवानShani Dev  का स्थान सब से ऊपर है भगवान Shani Dev इंसान के अच्छे और बुरे कामओ का नियाए करते है  औरShani Dev  की कहानी है जो आज आप को हमारे ब्लॉग के माध्य्म से आhindikahaniy1999.blogspot.comसे 

shani dev bhagwan

भगवानShani Dev सूर्य के पुत्र थे  भगवान Shani Dev की माता जी का नाम संध्या उन की दो संतान  थे एक का नाम यम था और एक यमी था 

संध्या अपने परिवार का पूरा ख्याल रखती थी पर सूर्य भगवान की किरणे तेज होने के कारण संध्या से बर्दाश से बहार था एक

shani bhagwan-शनि भगवान

र एक दिन संध्या ने अपनी प्रतिभा को अपनी परछाई देदी  और उस को हूबू हु अपने जैसी बना दिया  जो की देखने में बात करने और चलने में बिलकुल संध्या की जैसी दिखती थी और बच्चो का ख्याल भी उस की तरा रखती थी


एक दिन  संध्या अपनी परछाई को  कुछ टाइम के लिए उस को अकेला छोड़ कर चली जाती है और तपस्या में वास्त हो जाती है परछाई को ये बोला था की अगर वो ना हो तो ये बात किसी को नहीं बातये की वो संध्या  नहीं परछाई है 


तीनो  लोगों में  में उस को सब परछाई नहीं बल्कि सब उन को संध्या ही समझते  थे और संध्या ने बोला था की वो बुलकर भी सूर्य देव के पास ना जाये बस बच्चो का ख्याल रखे 


पर एक दिन सूर्य देव ने परछाई को अपनी अर्थागनी समझ कर उस के सात उनोने उस के सात पत्नी और पति वाला एक रिस्ता बना लिया 


फिर भगवान शनि देव का जन्म हुआ सूर्य देव ने शनि देव को देख कर ही समझ गए की वो शनि देव ने  संध्या की कोक से जन्म नहीं लिया है ये और कोई है 


क्यों की उन की दो संतान थी वो दोनों का राग साफ था औरShani Dev का राग सावला था जब संध्या को ये बात पता चली तो परछाई (छाया )  पर बहुत गुसा आया और उस के


 बाद संध्या उन दोनों से नफरत करने लगी Shani Dev और उन की माँ से  जिन हालत मेंShani Dev  का जन्म हुआ था उस के बाद से संध्या  उन से जिंदगी भर नफरत करती रही 


bhagwan shani dev chaal


भगवान Shani Devसे तीनो लोगों में डर है उन से इंसान तो क्या देवता भी डरते है क्यों की उन का गुसा खरब है ये सब जानते है जब वो क्रोध में आजाते है तो उन को सन्त करना मुश्किल है 


भगवानShani Dev  सूर्य के पुत्र है ये बात तो सब को पता है पर क्या आप को ये पता है की उन की सौतेली माँ उन से बहुत नफरत करती थी एक बार की बात है जब भगवान



 शिनदेव को भूख लगी थी तो उन को उन की सौतेली माँ ने कहा की पहले में अपने बच्चो को खाना खिलाऊंगी उस के बाद अगर कुछ बचता है तो में तेको देदूगी 


उन की सौतेली माँ की बात सुन कर Shani Dev को गुसा और उन को एक लात मार दी तब उन की सौतेली माँ (संध्या) ने


 शनि देव को गुसे में श्राप देदिया की जिस पैर से मेको लात मारी वो पैर टूट जाये और उस के बाद उन का पैर टूट गया 


परShani Dev  का जन्म कोई भी हालत में हुआ हो पर सूर्य देव के आखिर वो उन की संतान है सूर्य देव ने बोले की में तुमर ऊपर जो श्रापहै उस को नहीं हटा सकता पर



 तुम्हारा जो पर टुटा है वो में सही कर सकता हु और भगवान Shani Dev का पैर सही कर दिया सूर्य देव ने इस लिए शनि देव को कहते है टेढ़ी चाल


हमेशा गुस्से में रहने वालेShani Dev वो अपनी ज़िन्दगी में कभी भी विवहा नहीं करना चाते थे पर उन के पिता के काने पर उनोने उन का मन रहखने के लिए उनोने विवहा कर लिया पर उनोने अपनी पत्नी को कभी भी पत्नी नहीं



 माना एक दिन उन की पत्नी ने उन से कहा की मेको आप से संतान चाहिए तो उन के पति ने शनि देव  ने उन से खा ये नहीं हो सकता है उन की पत्नी ने पूछा क्यों नहीं हो सकता तो वो बाले की में तुम को अपनी पत्नी नहीं


 मानता तो उन की पत्नी ने गुसे में उन को श्रापदेदिया की जैसे की तुम मेको नहीं देकते हो वैसे ही तुम को कोई नहीं देखगा 


देव लोग ये श्राप  को वापस लेनेको कहा पर उन की पत्नी ने कहा की वो तो मुंकिन नहीं है पर जो भी जो भक्त आप की आंखों में देखने से पहले भगवान शिव जी का नाम लेगा तो उस को कोई नुकसान नहीं होगा इस लिए शनि देव के भक्त उन की आंखों में नहीं देखते है 


दोस्तों उम्मीद करता हु की आप को शनि देव की कहानी पसंद आयी होगी और पसंद आये तो इस को अपने दोस्तों में शेर करे hindikahaniy


shani dev bhagwan ki aarti


shani dev bhagwan ki aarti गाने से जिस के ऊपर अगर कोई मुसीबत होती है वो दूर हो जाती है किसी के धन्दे पर कोई फर्क नहीं हो रहा हो वो शनि देव की सूबे शाम shani dev aarti करने बर्कत होती है 

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